बस्तर में माओवाद का खात्मा और 'सेवा कैंपों' से नया सूर्योदय: अमित शाह ने 70 सुरक्षा कैंपों को सेवा केंद्रों में बदलने का किया उद्घाटन
The Eradication of Maoism in Bastar and a New Dawn
The Eradication of Maoism in Bastar, चार दशक से माओवद की खूनी क्रांति से जूझ रहा बस्तर अब एक नए क्रांतिकारी बदलाव की ओर अग्रसर है। कभी माओवादियों से लड़ने के लिए बनाए गए सुरक्षा कैंपों के सहारे इस बदलाव की पटकथा तैयार की जा रही है।
इसके लिए इन सुरक्षा कैंपों को सेवा कैंपों में तब्दील किया जाएगा, जो जन-जन तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में काम करेंगे।
सेवा कैंपों की शुरुआत ऐतिहासिक कदम
गृह और सहकारिता मंत्री ने कांकेर के नेतानार में सुरक्षा कैंप में सेवा केंद्र का उद्घाटन कर इसकी शुरुआत की। शाह ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छोटा लेकिन क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने साफ किया कि माओवाद को तभी पूरी तरह से समाप्त माना जाएगा, जब उससे हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। इसके लिए उन्होंने पांच साल की समय सीमा तय कर दी।
दरअसल माओवादियों को खत्म में इन फॉरबर्ड ऑपरेशनल बेस (एफओबी) रूप में स्थापित इन सुरक्षा कैंपों की अहम भूमिका रही है। अकेले बस्तर में लगभग 200 सुरक्षा कैंप हैं।
माओवादी हिंसा के समाप्त होने के बाद इन सुरक्षा कैंपों की उपयोगिता को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। अमित शाह ने साफ किया कि अब यही कैंप सेवा केंद्र के रूप में आदिवासियों के विकास के लिए काम करेंगे।
इसके लिए नेशनल स्कूल ऑफ डिजाइन से संरचना का मॉडल तैयार करने को कहा गया है। ताकि एक जगह पर कौशल प्रशिक्षण, बैंकिग, आधार व राशन कार्ड बनाने के साथ-साथ 371 सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जा सके।
अकेले बस्तर में लगभग 200 सुरक्षा कैंप हैं, इनमें से पहले 70 कैंपों को डेढ़ साल के भीतर सेवा केंद्र में तब्दील करने का लक्ष्य है। माओवादी हिंसा के खात्मे को बस्तर के लिए नया सूर्योदय बताते हुए उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में इसे पूरे देश में सबसे विकसित जनजातीय संभाग के रूप में विकसित किया जाएगा।
नेतनार के सुरक्षा कैंप में सेवा केंद्र का नाम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर गुण्डाधुर के नाम पर रखकर भी माओवादी के विमर्श को करारा जवाब दिया गया। एक ओर बस्तर को लोगों को अपने अमर सेनानियों की याद दिलाई गई, वहीं बस्तर में शांति स्थापित कर विकास योजनाओं को पहुंचाने की प्रतिबद्धता भी दिखाई।
2013 में स्थापित इस कैंप पर 2016 में हुए माओवादी हमले में छह पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि पूरा देश भले ही 1947 में आजाद हो गया हो, लेकिन बस्तर के लोगों के लिए सच्ची आजादी माओवाद के खात्मे के बाद ही आई है।
विकास नहीं होने के कारण आदिवासियों के माओवादियों से जुड़ने को ध्वस्त करते हुए अमित शाह ने कहा कि सच्चाई यह है माओवादी हिंसा के कारण बस्तर विकास से अछूता रह गया।
शाह ने कहा कि माओवाद को समाप्त करने का उद्देश्य केवल माओवादियों का खात्मा करना नहीं बल्कि इस क्षेत्र के गरीब आदिवासियों के जीवन में वे सभी सुविधाएं पहुंचाना भी था, जो बड़े-बड़े शहरों में उपलब्ध हैं, जिससे उनके बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल बन सके
शाह ने परंपरागत कृषि और वन उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग के साथ ही अमूल की तर्ज पर बस्तर में दूध उत्पादन को बढ़ावा देकर खुशहाली लाने का रोडमैप भी बताया। इसके लिए सभी आदिवासी परिवारों को दो-दो पशु दिये जाएंगे।
एक दूसरे कार्यक्रम में अमित शाह ने माओवाद प्रभावित सभी राज्यों के पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ माओवाद के खिलाफ आपरेशन में लगी एजेंसियों और उनमें अहम भूमिका निभाने वाले पुलिस व अन्य अधिकारियों को सम्मानित किया।
अमित शाह को माओवाद मुक्त छत्तीसगढ़ में स्वागत की बात कर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एक तरह के माओवाद के खात्मे का ऐलान भी कर दिया। अमित शाह ने भी कहा कि 31 मार्च 2026 के बाद बस्तर में नया सूर्योदय हुआ है।